श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 191: ब्रह्मचर्य और गार्हस्थ्य आश्रमोंके धर्मका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.191.5 
भरद्वाज उवाच
किं कस्य धर्माचरणं किं वा धर्मस्य लक्षणम्।
धर्म: कतिविधो वापि तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज ने पूछा - ब्रह्मन्! मनुष्य के धार्मिक आचरण का स्वरूप क्या है अथवा धर्म के लक्षण क्या हैं? अथवा धर्म कितने प्रकार के होते हैं? कृपया मुझे यह सब बताइए।
 
Bharadwaj asked - Brahman! What is the nature of a person's religious conduct or what are the characteristics of religion? Or how many types of religion are there? Please tell me all this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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