vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति
»
श्लोक 16
श्लोक
12.189.16
अविस्रम्भे न गन्तव्यं विस्रम्भे धारयेन्मन:।
मन: प्राणे निगृह्णीयात् प्राणं ब्रह्मणि धारयेत्॥ १६॥
अनुवाद
जो मार्ग विश्वास के योग्य नहीं है, उस पर मत चलो और जो विश्वास के योग्य है, उस पर ध्यान लगाओ। मन को प्राण में और आत्मा को ब्रह्म में स्थापित करो। 16॥
Do not follow the path which is not worthy of trust and concentrate on what is worthy of trust. Establish the mind in life and the soul in Brahma. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×