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mahabharat 12.187.3: भारद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! यदि जीव अग्नि की तरह नष्ट न हो, तो ईंधन के जलने पर वह भी बुझ जाता है; फिर उसे प्राप्त नहीं किया जा सकता।   |   mahabharat अध्याय 12.187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.187.3 
भरद्वाज उवाच
अग्नेर्यथा तथा तस्य यदि नाशो न विद्यते।
इन्धनस्योपयोगान्ते स चाग्निर्नोपलभ्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! यदि जीव अग्नि की तरह नष्ट न हो, तो ईंधन के जलने पर वह भी बुझ जाता है; फिर उसे प्राप्त नहीं किया जा सकता।
 
Bharadwaj asked - O Lord! If a living being is not destroyed like fire, then it too gets extinguished when the fuel is burnt; then it cannot be attained.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)