भरद्वाज उवाच
अग्नेर्यथा तथा तस्य यदि नाशो न विद्यते।
इन्धनस्योपयोगान्ते स चाग्निर्नोपलभ्यते॥ ३॥
अनुवाद
भारद्वाज ने पूछा - हे प्रभु! यदि जीव अग्नि की तरह नष्ट न हो, तो ईंधन के जलने पर वह भी बुझ जाता है; फिर उसे प्राप्त नहीं किया जा सकता।
Bharadwaj asked - O Lord! If a living being is not destroyed like fire, then it too gets extinguished when the fuel is burnt; then it cannot be attained.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥