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mahabharat 12.187.22: यह सम्पूर्ण जगत जल से बना है। प्राणियों का शरीर भी अधिकांशतः जल से बना है। मन में स्थित आत्मा उसमें विद्यमान है। वह समस्त प्राणियों में जगत के रचयिता ब्रह्मा के नाम से प्रसिद्ध है; क्योंकि समस्त प्राणियों के मिलन का नाम ब्रह्मा है।   |   mahabharat अध्याय 12.187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.187.22 
आपोमयमिदं सर्वमापो मूर्ति: शरीरिणाम्।
तत्रात्मा मानसो ब्रह्मा सर्वभूतेषु लोककृत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यह सम्पूर्ण जगत जल से बना है। प्राणियों का शरीर भी अधिकांशतः जल से बना है। मन में स्थित आत्मा उसमें विद्यमान है। वह समस्त प्राणियों में जगत के रचयिता ब्रह्मा के नाम से प्रसिद्ध है; क्योंकि समस्त प्राणियों के मिलन का नाम ब्रह्मा है।
 
This entire world is made up of water. The body of living beings is also mostly made up of water. The soul residing in the mind is present in it. He is famous among all the living beings by the name of Brahma, the creator of the world; because the name of the union of all living beings is Brahma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)