हृष्यति क्रुद्धॺते कोऽत्र शोचत्युद्विजते च क:।
इच्छति ध्यायति द्वेष्टि वाचमीरयते च क:॥ १८॥
अनुवाद
अतः जिज्ञासा होती है कि इस शरीर में कौन हर्षित होता है और कौन रुष्ट होता है ? कौन शोक और व्याकुलता अनुभव करता है ? कौन इच्छा करता है, ध्यान करता है, द्वेष करता है और वार्तालाप करता है ?॥18॥
Hence, there is curiosity as to who rejoices and who gets angry in this body? Who feels sorrow and agitation? Who desires, meditates, hates and talks?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥