श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 185: शरीरके भीतर जठरानल तथा प्राण-अपान आदि वायुओंकी स्थिति आदिका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.185.8 
संधिष्वपि च सर्वेषु संनिविष्टस्तथानिल:।
शरीरेषु मनुष्याणां व्यान इत्युपदिश्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मानव शरीर और उसके सभी जोड़ों में जो वायु विद्यमान है उसे 'व्यान' कहते हैं। 8.
 
The air that is present in the human body and all its joints is called 'Vyana'. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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