प्रस्थिता हृदयात् सर्वे तिर्यगूर्ध्वमधस्तथा।
वहन्त्यन्नरसान् नाडॺो दश प्राणप्रचोदिता:॥ १५॥
अनुवाद
हृदय से ही समस्त प्राण वायुएँ इधर-उधर तथा ऊपर-नीचे चलती हैं; अतः दस प्राणों द्वारा परिचालित समस्त नाड़ियाँ अन्न का रस ले जाती हैं ॥15॥
All the vital airs move here and there and up and down from the heart; hence, all the nerves, circulated by the ten vital airs, carry the juice of the food. ॥ 15॥