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श्लोक 12.185.13  |
अग्निवेगवह: प्राणो गुदान्ते प्रतिहन्यते।
स ऊर्ध्वमागम्य पुन: समुत्क्षिपति पावकम्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| अग्नि के बल से प्रवाहित प्राणशक्ति गुदाद्वार के पास रुक जाती है; फिर ऊपर की ओर लौटकर समीपस्थ अग्नि को भी ऊपर उठाती है ॥13॥ |
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| The life force flowing with the force of fire gets halted near the anus; then returning upwards it raises the nearby fire as well. ॥13॥ |
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