श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.184.7 
अनूष्मणामचेष्टानां घनानां चैव तत्त्वत:।
वृक्षाणां नोपलभ्यन्ते शरीरे पञ्च धातव:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वृक्षों के शरीर में गर्मी नहीं होती, गति नहीं होती और वास्तव में वे ठोस होते हैं; इसलिए उनके शरीर में पाँचों तत्त्व विद्यमान नहीं होते ॥7॥
 
There is no heat in the bodies of trees, there is no movement and in reality they are solid; hence the five elements are not present in their bodies. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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