श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.184.6 
भरद्वाज उवाच
पञ्चभिर्यदि भूतैस्तु युक्ता: स्थावरजङ्गमा:।
स्थावराणां न दृश्यन्ते शरीरे पञ्च धातव:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज ने पूछा - प्रभु ! आपके कथनानुसार यदि समस्त स्थावर-जंगम वस्तुओं को इन पंचमहाभूतों से युक्त कर दिया जाए, तो जीवों के शरीर में ये पांचों भूत दिखाई नहीं देते ॥6॥
 
Bharadwaja asked – Lord! According to your statement, if all the immovable and movable objects are united with these five great elements, then the five elements are not visible in the bodies of the living beings. 6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd