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mahabharat 12.184.44: जल, अग्नि और वायु- ये तीन तत्त्व देहधारियों में सदैव क्रियाशील रहते हैं। ये शरीर के आधार हैं और प्राण से व्याप्त होकर शरीर में स्थित रहते हैं॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 12.184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.184.44 
आपोऽग्निर्मारुतश्चैव नित्यं जाग्रति देहिषु।
मूलमेते शरीरस्य व्याप्य प्राणानिह स्थिता:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जल, अग्नि और वायु- ये तीन तत्त्व देहधारियों में सदैव क्रियाशील रहते हैं। ये शरीर के आधार हैं और प्राण से व्याप्त होकर शरीर में स्थित रहते हैं॥ 44॥
 
Water, fire and air-these three elements are always active in embodied beings. These are the basis of the body and remain in the body being permeated with life.॥ 44॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे चतुरशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु-भरद्वाजसंवादविषयक एक सौ चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)