Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.184.40-41: शब्द अपने व्यापक स्वरूप के कारण सर्वत्र है, परंतु पटह (ढोल) आदि में उसकी अभिव्यक्ति विशेष रूप से होती है। मृदंग, भेरी, शंख, मेघ, रथ की घरघराहट आदि में जो भी शब्द सुनाई देते हैं तथा जड़ या चेतन के जो भी शब्द सुनाई देते हैं, उन सबका वर्णन इन सात विभागों के अंतर्गत किया गया है। 40-41॥ | mahabharat अध्याय 12.184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शब्द अपने व्यापक स्वरूप के कारण सर्वत्र है, परंतु पटह (ढोल) आदि में उसकी अभिव्यक्ति विशेष रूप से होती है। मृदंग, भेरी, शंख, मेघ, रथ की घरघराहट आदि में जो भी शब्द सुनाई देते हैं तथा जड़ या चेतन के जो भी शब्द सुनाई देते हैं, उन सबका वर्णन इन सात विभागों के अंतर्गत किया गया है। 40-41॥
Due to its widespread nature, the word is everywhere, but it is especially expressed in Patah (drums) etc. Whatever words are heard in Mridang, Bheri, conch, clouds, whirring of chariot etc. and whatever words of matter or consciousness are audible, all have been described under these seven divisions. 40-41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥