| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन » श्लोक 29-30 |
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| | | | श्लोक 12.184.29-30  | ज्योति: पश्यति चक्षुर्भ्यां स्पर्शं वेत्ति च वायुना॥ २९॥
शब्द: स्पर्शश्च रूपं च रसश्चापि गुणा: स्मृता:।
रसज्ञानं तु वक्ष्यामि तन्मे निगदत: शृणु॥ ३०॥ | | | | | | अनुवाद | | मनुष्य दोनों आँखों से रूप को देखता है और त्वचा इन्द्रियों से स्पर्श का अनुभव करता है। शब्द, स्पर्श, रूप और रस - ये जल के गुण माने गए हैं। इनमें मुख्य गुण स्वाद है, उसके ज्ञान के लिए अब मैं उसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन करूँगा। तुम मुझसे उसे सुनो।॥29-30॥ | | | | A man sees form with both eyes and experiences touch with his skin senses. Sound, touch, form and taste – these are considered to be the qualities of water. The main quality among them is taste, for its knowledge I will now describe its different types. You listen to it from me.॥ 29-30॥ | | ✨ ai-generated | | |
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