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mahabharat 12.184.27: गंध, स्पर्श, रस, रूप और शब्द - ये पृथ्वी के गुण माने गए हैं। इनमें से मैं मुख्य गंध के गुणों का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.184.27 
गन्ध: स्पर्शो रसो रूपं शब्दश्चात्र गुणा: स्मृता:।
तस्य गन्धस्य वक्ष्यामि विस्तराभिहितान् गुणान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
गंध, स्पर्श, रस, रूप और शब्द - ये पृथ्वी के गुण माने गए हैं। इनमें से मैं मुख्य गंध के गुणों का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ ॥27॥
 
Smell, touch, taste, form and sound – these are considered to be the qualities of the earth. Among these, I describe in detail the properties of the main smell. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)