श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.184.23 
श्लेष्मा पित्तमथ स्वेदो वसा शोणितमेव च।
इत्याप: पञ्चधा देहे भवन्ति प्राणिनां सदा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कफ, पित्त, पसीना, चर्बी और रक्त- ये पाँच गीले पदार्थ प्राणियों के शरीर में जल के रूप में विद्यमान रहते हैं । 23॥
 
Phlegm, bile, sweat, fat and blood – these five wet things present in the body of living beings are in the form of water. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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