Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.184.17: जब वृक्ष कट जाते हैं, तो उनमें नए अंकुर फूटते हैं और वे सुख-दुःख का अनुभव करते हैं। इससे मैं देखता हूँ कि वृक्षों में भी सजीव प्राणी होते हैं। वे जड़ नहीं हैं॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुखदु:खयोश्च ग्रहणाच्छिन्नस्य च विरोहणात्।
जीवं पश्यामि वृक्षाणामचैतन्यं न विद्यते॥ १७॥
अनुवाद
जब वृक्ष कट जाते हैं, तो उनमें नए अंकुर फूटते हैं और वे सुख-दुःख का अनुभव करते हैं। इससे मैं देखता हूँ कि वृक्षों में भी सजीव प्राणी होते हैं। वे जड़ नहीं हैं॥17॥
When trees are cut down, new shoots sprout from them and they experience joy and sorrow. From this I see that trees also have living beings. They are not inanimate.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥