श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 184: पञ्चमहाभूतोंके गुणोंका विस्तारपूर्वक वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.184.16 
वक्त्रेणोत्पलनालेन यथोर्ध्वं जलमाददेत्।
तथा पवनसंयुक्त: पादै: पिबति पादप:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जैसे मनुष्य कमल के फूल के तने को मुँह में रखकर जल को ऊपर की ओर खींचता है, वैसे ही वृक्ष वायु की सहायता से अपनी जड़ों द्वारा जल को ऊपर की ओर खींचता है॥16॥
 
Just as a man draws water upwards through the stem of a lotus flower by placing it in his mouth, similarly a tree, with the help of air, draws water upwards through its roots.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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