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mahabharat 12.183.4: पृथ्वी, पर्वत, बादल और अन्य सभी भौतिक वस्तुएँ जल से बनी हुई समझनी चाहिए, क्योंकि जल ही इन सबको स्थिर रखता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.183.4 
पृथिवी पर्वता मेघा मूर्तिमन्तश्च ये परे।
सर्वं तद् वारुणं ज्ञेयमापस्तस्तम्भिरे यत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, पर्वत, बादल और अन्य सभी भौतिक वस्तुएँ जल से बनी हुई समझनी चाहिए, क्योंकि जल ही इन सबको स्थिर रखता है ॥4॥
 
The earth, mountains, clouds and all other material things should be considered as composed of water because it is water that keeps them all stable. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)