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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन
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श्लोक 16
श्लोक
12.183.16
तस्याकाशे निपतित: स्नेहस्तिष्ठति योऽपर:।
स संघातत्वमापन्नो भूमित्वमनुगच्छति॥ १६॥
अनुवाद
‘आकाश में जो नमी गिरी, वह घनीभूत होकर पृथ्वी में परिवर्तित हो गई ।॥16॥
‘The wetness which fell into the sky condensed and transformed into the earth.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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