श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 183: आकाशसे अन्य चार स्थूल भूतोंकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.183.11 
यथा भाजनमच्छिद्रं नि:शब्दमिव लक्ष्यते।
तच्चाम्भसा पूर्यमाणं सशब्दं कुरुतेऽनिल:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जैसे छिद्ररहित पात्र मौन प्रतीत होता है; परन्तु जब उसमें छिद्र करके जल भर दिया जाता है, तब वायु के कारण उसमें ध्वनि उत्पन्न हो जाती है।॥11॥
 
Just as a vessel without holes appears to be silent; but when a hole is made in it and water is filled in it, then the air causes sound to appear in it.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)