श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.182.5 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
भृगुणाभिहितं शास्त्रं भरद्वाजाय पृच्छते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले - राजन! विद्वान लोग इस विषय में एक प्राचीन इतिहास का उदाहरण देते हैं, जिसमें उल्लेख है कि प्रश्न पूछने पर भृगु ने भारद्वाज को उपदेश दिया था॥5॥
 
Bhishma said - King! Learned people give the example of an ancient history in this matter, in which it is mentioned that Bhrigu gave advice to Bharadwaj after he asked the question. ॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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