श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.182.36 
भरद्वाज उवाच
पुष्कराद् यदि सम्भूतो ज्येष्ठं भवति पुष्करम्।
ब्रह्माणं पूर्वजं चाह भवान् संदेह एव मे॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भरद्वाज ने पूछा - प्रभु ! यदि ब्रह्माजी कमल से प्रकट हुए हैं, तो कमल ही सबसे बड़ा प्रतीत होता है; परंतु आपने कहा है कि ब्रह्माजी ही पूर्वज हैं; इसलिए मेरे मन में यह संदेह रह गया ॥36॥
 
Bharadwaj asked - Lord! If Brahmaji appeared from the lotus, then the lotus itself appears to be the eldest; but you have said that Brahmaji is the ancestor; hence this doubt remained in my mind. ॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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