तत्पश्चात् पूर्वोक्त कमलसे सर्वज्ञ, मूर्तिरूप, प्रभावशाली, परम कल्याणकारी तथा प्रथम प्रजापति धर्मात्मा ब्रह्माजी प्रकट हुए ॥35॥
Thereafter, from the aforesaid lotus, the omniscient, idol-like, influential, supremely good and the first Prajapati, the righteous Brahma emerged. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥