श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.182.28 
रसातलान्ते सलिलं जलान्ते पन्नगाधिपा:।
तदन्ते पुनराकाशमाकाशान्ते पुनर्जलम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
रसातल के अंत में जल है। जल के अंत में सर्पराज है। उसके अंत में पुनः आकाश है और आकाश के अंत में पुनः जल है।॥28॥
 
At the end of the abyss there is water. At the end of the water there is the King of Snakes. At the end of it there is sky again and at the end of the sky there is water again.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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