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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन
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श्लोक 22
श्लोक
12.182.22
भरद्वाज उवाच
गगनस्य दिशां चैव भूतलस्यानिलस्य वा।
कान्यत्र परिमाणानि संशयं छिन्धि तत्त्वत:॥ २२॥
अनुवाद
भरद्वाज ने पूछा - हे प्रभु ! आकाश, दिशा, पृथ्वी और वायु का आकार क्या है ? कृपया इसे ठीक-ठीक बताकर मेरा संदेह दूर कीजिए ॥ 22॥
Bharadwaj asked - O Lord! What is the size of the sky, direction, earth and air? Please tell me this accurately and remove my doubt.॥ 22॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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