श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.182.15 
ततस्तेजोमयं दिव्यं पद्मं सृष्टं स्वयम्भुवा।
तस्मात् पद्मात् समभवद् ब्रह्मा वेदमयो निधि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् स्वयंभू मानसदेव ने सर्वप्रथम एक दिव्य तेजोमय कमल का निर्माण किया, उस कमल से वेदों के कोष के रूप में ब्रह्माजी प्रकट हुए।
 
After that, the self-born Manasdev first created a divine lotus full of light. From that lotus, Brahmaji appeared in the form of the treasure of Vedas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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