श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 182: भरद्वाज और भृगुके संवादमें जगत‍् की उत्पत्तिका और विभिन्न तत्त्वोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.182.1 
युधिष्ठिर उवाच
कुत: सृष्टमिदं विश्वं जगत‍् स्थावरजङ्गमम्।
प्रलये च कमभ्येति तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! यह सम्पूर्ण स्थावर-जंगम ब्रह्माण्ड कहाँ से उत्पन्न हुआ है? प्रलयकाल में यह किसमें विलीन हो जाता है? कृपया मुझे यह बताइए।"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! Where did this entire mobile and immobile universe originate from? What does it merge into during the time of destruction? Please tell me this."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas