श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 180: सद्‍बुद्धिका आश्रय लेकर आत्महत्यादि पापकर्मसे निवृत्त होनेके सम्बन्धमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.180.43 
स्वाध्यायमग्निसंस्कारमप्रमत्तोऽनुपालय।
सत्यं दमं च दानं च स्पर्धिष्ठा मा च केनचित्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
‘सावधान रहो और स्वाध्याय, अग्निहोत्र, सत्य, संयम और दान के नियमों का पालन करो। किसी से प्रतिस्पर्धा मत करो।॥ 43॥
 
‘Be careful and follow the rules of self-study, Agnihotra, truth, self-control and charity. Do not compete with anyone.॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)