श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 180: सद्‍बुद्धिका आश्रय लेकर आत्महत्यादि पापकर्मसे निवृत्त होनेके सम्बन्धमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.180.32 
यानि चान्यानि भूतेषु भक्ष्यजातानि कस्यचित्।
येषामभुक्तपूर्वाणि तेषामस्मृतिरेव ते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जीवों में पाई जाने वाली अन्य कोई भी ऐसी खाद्य वस्तु तुम्हें कभी याद नहीं आएगी जिसका तुमने पहले सेवन न किया हो ॥32॥
 
'You will never remember any other edible items found among living beings that you have not consumed before. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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