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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 180: सद्बुद्धिका आश्रय लेकर आत्महत्यादि पापकर्मसे निवृत्त होनेके सम्बन्धमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद
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श्लोक 18
श्लोक
12.180.18
दिष्टॺा त्वं न शृगालो वै न कृमिर्न च मूषक:।
न सर्पो न च मण्डूको न चान्य: पापयोनिज:॥ १८॥
अनुवाद
‘तुम बड़े भाग्यशाली हो कि तुमने गीदड़, कीड़ा, चूहा, साँप, मेंढक अथवा किसी अन्य पाप योनि में जन्म नहीं लिया ॥18॥
‘You are very fortunate that you were not born as a jackal, a worm, a rat, a snake, a frog or in any other sinful form.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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