श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 180: सद्‍बुद्धिका आश्रय लेकर आत्महत्यादि पापकर्मसे निवृत्त होनेके सम्बन्धमें काश्यप ब्राह्मण और इन्द्रका संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.180.16 
अधिष्ठाय च गां लोके भुञ्जते वाहयन्ति च।
उपायैर्बहुभिश्चैव वश्यानात्मनि कुर्वते॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हाथवाले मनुष्य बैलों से जुती हुई गाड़ी पर चढ़कर उसे हांकते हैं और संसार में उसका भरपूर उपयोग करते हैं। तथा अपने हाथों के द्वारा वे मनुष्यों को अपने वश में करने के लिए अनेक प्रकार के उपाय करते हैं॥16॥
 
‘The men having hands mount on the cart drawn by oxen and drive them and make full use of them in the world. And by using their hands they use many tricks to bring people under their control.॥ 16॥
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