श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.18.7 
कथमुत्सृज्य राज्यं स्वं धनधान्यसमन्वितम्।
कापालीं वृत्तिमास्थाय धानामुष्टिर्न ते वर:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"राजा! आपने अपना समृद्ध राज्य छोड़कर यह बर्तन लेकर भीख मांगने का धंधा कैसे शुरू कर दिया? ये मुट्ठी भर जौ आपको शोभा नहीं देते।"
 
‘King! How did you leave your rich kingdom and take up this business of begging with a pot? This handful of barley does not suit you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)