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mahabharat 12.18.35: महाराज! आप अपनी इन्द्रियों को वश में करके नग्न रहने वाले, मुण्डित सिर वाले, जटाधारी, गेरुआ वस्त्र, मृगचर्म और छाल के वस्त्र धारण करने वाले ऋषियों का साथ दें और पवित्र लोकों पर विजय प्राप्त करें।   |   mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.18.35 
काषायैरजिनैश्चीरैर्नग्नान् मुण्डान् जटाधरान्।
बिभ्रत् साधून् महाराज जय लोकान् जितेन्द्रिय:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप अपनी इन्द्रियों को वश में करके नग्न रहने वाले, मुण्डित सिर वाले, जटाधारी, गेरुआ वस्त्र, मृगचर्म और छाल के वस्त्र धारण करने वाले ऋषियों का साथ दें और पवित्र लोकों पर विजय प्राप्त करें।
 
'Maharaj! By controlling your senses, you should support the sages who stay naked, have shaven heads and keep matted hair, with saffron clothes, deerskin and bark clothes, and conquer the holy worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)