श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.18.3 
उत्सृज्य राज्यं भिक्षार्थं कृतबुद्धिं नरेश्वरम्।
विदेहराजमहिषी दु:खिता यदभाषत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक बार राजा जनक ने भी राज्य त्यागकर भिक्षावृत्ति पर जीवन निर्वाह करने का निश्चय किया था। उस समय विदेहराज की रानी ने दुःखी होकर जो कुछ कहा था, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ।
 
Once King Janaka had also decided to give up his kingdom and live on alms. I am telling you whatever the Queen of Videhraj had said in sorrow at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)