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mahabharat 12.18.20: यदि तू सब कुछ त्यागकर भी मुट्ठी भर जौ के लिए दूसरों की दया चाहता है, तो राज्य आदि सब पदार्थ भी इसी के समान हैं। फिर उस राज्य को त्यागने में क्या विशेषता है?॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 12.18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनका राजा जनक और उनकी रानीका दृष्टान्त देते हुए युधिष्ठिरको संन्यास ग्रहण करनेसे रोकना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.18.20 
यस्त्वयं सर्वमुत्सृज्य धानामुष्टेरनुग्रह:।
यदानेन समं सर्वं किमिदं ह्यवसीयसे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यदि तू सब कुछ त्यागकर भी मुट्ठी भर जौ के लिए दूसरों की दया चाहता है, तो राज्य आदि सब पदार्थ भी इसी के समान हैं। फिर उस राज्य को त्यागने में क्या विशेषता है?॥ 20॥
 
‘If you want the mercy of others for a handful of barley even after giving up everything, then all other things like kingdom etc. are also similar to this. Then what is the specialty of giving up that kingdom?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)