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mahabharat 12.179.9: भीष्म कहते हैं - हे राजन! प्रह्लाद के ऐसा पूछने पर लोकधर्म के नियमों को जानने वाले मुनि ने उसे मधुर एवं अर्थपूर्ण ढंग से यह बात बताई।   |   mahabharat अध्याय 12.179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.179.9 
भीष्म उवाच
अनुयुक्त: स मेधावी लोकधर्मविधानवित्।
उवाच श्लक्ष्णया वाचा प्रह्रादमनपार्थया॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! प्रह्लाद के ऐसा पूछने पर लोकधर्म के नियमों को जानने वाले मुनि ने उसे मधुर एवं अर्थपूर्ण ढंग से यह बात बताई।
 
Bhishma says - O King! When Prahlada asked this, the wise sage who knew the rules of social religion told him this in a sweet and meaningful way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)