Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.179.33: मैंने ऐसे आत्मनिष्ठ महापुरुष को देखकर ज्ञान प्राप्त किया है, जो उन समस्त कामनारूपी विषयों से विरक्त हो गए हैं, जिनका परिणाम दुःख है। अतः मैं तृष्णा से व्याकुल चंचल मन को वश में करने के लिए पवित्र भावना से इस अजगर व्रत का पालन करता हूँ। 33॥ | mahabharat अध्याय 12.179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैंने ऐसे आत्मनिष्ठ महापुरुष को देखकर ज्ञान प्राप्त किया है, जो उन समस्त कामनारूपी विषयों से विरक्त हो गए हैं, जिनका परिणाम दुःख है। अतः मैं तृष्णा से व्याकुल चंचल मन को वश में करने के लिए पवित्र भावना से इस अजगर व्रत का पालन करता हूँ। 33॥
'I have gained knowledge by seeing such a great man who is self-oriented, who has become detached from all the objects of desire whose result is sorrow. Therefore, I observe this python fast with a sacred spirit to subdue the unrestrained mind troubled by thirst. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥