श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 179: प्रह्लाद और अवधूतका संवाद—आजगर-वृत्तिकी प्रशंसा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.179.16 
अन्तरिक्षचराणां च दानवोत्तम पक्षिणाम्।
उत्तिष्ठते यथाकालं मृत्युर्बलवतामपि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ दान! आकाश में विचरण करने वाले महापराक्रमी पक्षियों से भी पहले, मृत्यु समय पर आ जाती है ॥16॥
 
‘The best of charity! Death arrives in due time even before the mighty birds roaming in the sky. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)