पश्य प्रह्राद भूतानामुत्पत्तिमनिमित्तत:।
ह्रासं वृद्धिं विनाशं च न प्रहृष्ये न च व्यथे॥ १०॥
अनुवाद
प्रह्लाद! देख, इस जगत् के प्राणियों की उत्पत्ति, वृद्धि, पतन और प्रलय उस अकारण परमात्मा से ही हुए हैं; इसी कारण मैं न तो उनके लिए हर्ष प्रकट करता हूँ और न शोक करता हूँ॥10॥
'Prahlad! Look, the origin, growth, decline and destruction of the creatures of this world have happened only from the causeless Supreme Soul; For this reason I neither express joy nor feel distressed for them. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥