Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.177.7: जब वे उसकी गर्दन के पास पहुँचे, तो ऊँट को यह असहनीय लगा। वह गुस्से से भरकर उठ खड़ा हुआ और दोनों बछड़ों को अपने सिर के ऊपर लटकाए हुए तेज़ी से भागने लगा। | mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब वे उसकी गर्दन के पास पहुँचे, तो ऊँट को यह असहनीय लगा। वह गुस्से से भरकर उठ खड़ा हुआ और दोनों बछड़ों को अपने सिर के ऊपर लटकाए हुए तेज़ी से भागने लगा।
When they reached near his neck, the camel found it unbearable. He stood up in anger and started running very fast with both the calves hanging above his head. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥