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mahabharat 12.177.3: बुद्धिमान पुरुष इन पाँचों को शांति का कारण मानते हैं। यही स्वर्ग है, यही धर्म है और यही परम सुख माना गया है। ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 177: मङ्किगीता—धनकी तृष्णासे दु:ख और उसकी कामनाके त्यागसे परम सुखकी प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.177.3 
एतान्येव पदान्याहु: पञ्च वृद्धा: प्रशान्तये।
एष स्वर्गश्च धर्मश्च सुखं चानुत्तमं मतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष इन पाँचों को शांति का कारण मानते हैं। यही स्वर्ग है, यही धर्म है और यही परम सुख माना गया है। ॥3॥
 
Wise men consider these five things to be the cause of peace. This is heaven, this is religion and this is considered to be the ultimate happiness. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)