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श्लोक 12.176.4  |
उत्पन्नमिह लोके वै जन्मप्रभृति मानवम्।
विविधान्युपवर्तन्ते दु:खानि च सुखानि च॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| ‘इस संसार में जो कोई जन्म लेता है (चाहे वह धनवान हो या निर्धन) वह जन्म से ही अनेक प्रकार के सुख-दुःख भोगता है।॥4॥ |
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| ‘Whoever is born in this world (be it rich or poor) experiences various kinds of joys and sorrows right from his birth.॥ 4॥ |
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