श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.176.23 
इत्येतद्धास्तिनपुरे ब्राह्मणेनोपवर्णितम्।
शम्पाकेन पुरा मह्यं तस्मात् त्याग: परो मत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार हस्तिनापुर में शम्पाक नामक ब्राह्मण ने मुझसे त्याग का माहात्म्य कहा था, अतः त्याग ही श्रेष्ठ माना गया है॥ 23॥
 
In this manner, a Brahmin named Shampak had narrated to me the greatness of renunciation in Hastinapur. Hence, renunciation is considered to be the best.॥ 23॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि शम्पाकगीतायां षट्सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें शम्पाकगीताविषयक एक सौ छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७६॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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