श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.176.22 
नात्यक्त्वा सुखमाप्नोति नात्यक्त्वा विन्दते परम्।
नात्यक्त्वा चाभय: शेते त्यक्त्वा सर्वं सुखी भव॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘त्याग किए बिना कोई मनुष्य सुख नहीं पाता, त्याग किए बिना वह भगवान् को प्राप्त नहीं कर सकता और त्याग किए बिना उसे नींद नहीं आती। इसलिए तू भी सब कुछ त्यागकर सुखी हो जा’॥22॥
 
‘No man finds happiness without renouncing, he cannot attain God without renouncing and he cannot sleep without renouncing. Therefore you too should renouncing everything and become happy’॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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