श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.176.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
शम्पाकेनेह मुक्तेन गीतं शान्तिगतेन च॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! इस विषय में विद्वान पुरुष इस प्राचीन कथा का उदाहरण देते हैं, जो परम शान्त एवं मुक्त शम्पाक ने यहाँ कही थी।
 
Bhishma said, "Yudhishthira! In this matter learned men give the example of this ancient story, which was told here by the most peaceful and liberated Shampaka.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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