| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 12.176.19  | तमतिक्रान्तमर्यादमाददानं ततस्तत:।
प्रतिषेधन्ति राजानो लुब्धा मृगमिवेषुभि:॥ १९॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘जब वह इस प्रकार नियम का उल्लंघन करके इधर-उधर से धन लूटकर लाता है, तब राजा उसे कठोर दंड देकर रोक देता है, जैसे शिकारी हिरणों पर बाण चलाकर उनकी गति रोक देता है॥19॥ | | | | ‘When he violates the rules in this manner and loots and brings wealth from here and there, then the king stops him by giving him a harsh punishment, just as a hunter stops the movement of deer by shooting arrows at them.॥ 19॥ | | ✨ ai-generated | | |
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