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श्लोक 12.176.10  |
आकिंचन्यं च राज्यं च तुलया समतोलयम्।
अत्यरिच्यत दारिद्रॺं राज्यादपि गुणाधिकम्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| मैंने अपनी बुद्धि के तराजू पर दरिद्रता और राज्य को तौला और मेरे श्रेष्ठ गुणों के कारण दरिद्रता राज्य से भारी हो गई ॥10॥ |
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| 'I weighed poverty and kingdom on the scale of my wisdom and because of my superior qualities, poverty was heavier than kingdom.॥ 10॥ |
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