श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 176: त्यागकी महिमाके विषयमें शम्पाक ब्राह्मणका उपदेश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.176.10 
आकिंचन्यं च राज्यं च तुलया समतोलयम्।
अत्यरिच्यत दारिद्रॺं राज्यादपि गुणाधिकम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपनी बुद्धि के तराजू पर दरिद्रता और राज्य को तौला और मेरे श्रेष्ठ गुणों के कारण दरिद्रता राज्य से भारी हो गई ॥10॥
 
'I weighed poverty and kingdom on the scale of my wisdom and because of my superior qualities, poverty was heavier than kingdom.॥ 10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas