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mahabharat 12.174.63: भीष्म कहते हैं - हे राजन! ब्राह्मण के कहे हुए उपर्युक्त तथा अन्य युक्तिसंगत वचनों से राजा सेनजित का मन स्थिर हो गया। वह अपना शोक छोड़कर सुखी हो गया और सुखपूर्वक रहने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  12.174.63 
भीष्म उवाच
एतैश्चान्यैश्च विप्रस्य हेतुमद्भि: प्रभाषितै:।
पर्यवस्थापितो राजा सेनजिन्मुमुदे सुखी॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे राजन! ब्राह्मण के कहे हुए उपर्युक्त तथा अन्य युक्तिसंगत वचनों से राजा सेनजित का मन स्थिर हो गया। वह अपना शोक छोड़कर सुखी हो गया और सुखपूर्वक रहने लगा।
 
Bhishma says - O King! Due to the above and other logical words spoken by the Brahmin, the mind of King Senjit became stable. He left his sorrow and became happy and started living happily. 63.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि ब्राह्मणसेनजित्संवादकथने चतु:सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें ब्राह्मण और सेनजित् के संवादका कथनविषयक एक सौ चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७४॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ श्लोक मिलाकर कुल ६६ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)