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mahabharat 12.174.60: अब मैं मोहरूपी निद्रा से जाग गया हूँ और निरन्तर जागृत हूँ - मैंने कामनाओं का भी त्याग कर दिया है। अतः वे धूर्त नरकरूपी पुरुष अब कामनारूप धारण करके मुझे धोखा नहीं दे सकेंगे ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.174.60 
अकामां कामरूपेण धूर्ता नरकरूपिण:।
न पुनर्वञ्चयिष्यन्ति प्रतिबुद्धास्मि जागृमि॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
अब मैं मोहरूपी निद्रा से जाग गया हूँ और निरन्तर जागृत हूँ - मैंने कामनाओं का भी त्याग कर दिया है। अतः वे धूर्त नरकरूपी पुरुष अब कामनारूप धारण करके मुझे धोखा नहीं दे सकेंगे ॥60॥
 
Now I have awakened from the sleep of illusion and am constantly alert--I have also given up desires. Therefore, those cunning men in the form of hell will not be able to deceive me now by assuming the form of desire. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)