Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.59: आज से मैं उस शरीर को, जिसमें केवल एक स्तंभ और नौ द्वार हैं, दूसरों के लिए बंद कर दूँगी। यह जानते हुए भी कि सच्चा प्रियतम यहाँ आ रहा है, कौन स्त्री हाड़-मांस के पुतले को अपना प्रियतम मानेगी? | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकस्थूणं नवद्वारमपिधास्याम्यगारकम्।
का हि कान्तमिहायान्तमयं कान्तेति मंस्यते॥ ५९॥
अनुवाद
आज से मैं उस शरीर को, जिसमें केवल एक स्तंभ और नौ द्वार हैं, दूसरों के लिए बंद कर दूँगी। यह जानते हुए भी कि सच्चा प्रियतम यहाँ आ रहा है, कौन स्त्री हाड़-मांस के पुतले को अपना प्रियतम मानेगी?
From today onwards, I will close the body, which has only one pillar and nine doors, for others. Even after knowing that the true beloved is coming here, which woman will consider a mannequin of flesh and bones as her beloved?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥